गाँधी स्मारक पुस्तकालय
मुख्य समयरेखा
पुस्तकालय की ऐतिहासिक यात्रा की महत्वपूर्ण तिथियाँ:
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7 दिसंबर 1920 — महात्मा गांधी द्वारा गांधी आश्रम की नींव रखी गई।
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1956 — पुस्तकालय स्थापना हेतु विशेष बैठक; विचार जन्मा।
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24 जुलाई 1958 — गांधी आश्रम के एक कमरे से पुस्तकालय की औपचारिक शुरुआत।
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28 जून 1960 — पुस्तकालय भवन हेतु पहली भूमि खरीदी गई।
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2 दिसंबर 1960 — शेष भूमि खरीदी गई; कुल भूमि 10 कट्ठा 10 धुर।
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7 दिसंबर 1960 — राज्यपाल ज़ाकिर हुसैन द्वारा पुस्तकालय भवन की नींव रखी गई।
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1966–1978 — संस्थापक की अस्वस्थता के कारण पुस्तकालय लगभग बंदप्राय।
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2007 — सचिव चन्द्रकेत शर्मा का निधन; संरक्षक समिति का विचार।
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23 जनवरी 2009 — नई कार्यकारिणी समिति का गठन; भोलानाथ ठाकुर सचिव बने।
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12 नवंबर 2012 — संविधान प्रारूप पर अनुमंडलाधिकारी द्वारा बैठक एवं अनुमोदन।
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27 जनवरी 2013 — ट्रस्ट गठन का निर्णय।
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7 जुलाई 2013 — पाँच ट्रस्टी सदस्यों का चयन।
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14 नवंबर 2013 — गांधी स्मारक ट्रस्ट का पंजीकरण।
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वर्तमान — पुस्तकालय अपने ऐतिहासिक, साहित्यिक और सांस्कृतिक दायित्वों में सक्रिय।
गाँधी स्मारक पुस्तकालय
स्थापना और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
गाँधी स्मारक पुस्तकालय हाजीपुर, वैशाली के गौरवशाली इतिहास का एक सशक्त गवाह ह। यह उसी गाँधी आश्रम के पास स्थित है जिसकी नींव महात्मा गाँधी द्वारा 7 दिसंबर, 1920 में रखी गई थी। आगे चल कर यह स्थल उत्तर भारत में स्वतंत्रता आंदोलन का एक महत्वपूर्ण केंद्र बना था।
यहीं स्वतंत्रता सेनानी शहीद वैकुण्ठ शुक्ल, योगेंद्र शुक्ल जैसे गरम दल के नेता रहते थे और शहीद भगत सिंह भो अपनी योजनाओं व रणनीतियों के लिए यदा-कदा आते रहते थे। वही स्व० जयनंदन झा, स्वतंत्रता सेनानी व बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री दीप नारायण सिंह, अक्षयवट रॉय, सुनीति सिन्हा, एवं किशोरी प्रसन्न सिंह आदि भी अपनी गतिविधियों का संचालन यहाँ से किया करते थे।
पुस्तकालय की कल्पना और प्रारंभ (1956–1958)
गाँधी स्मारक पुस्तकालय आरम्भ करने का विचार भी पंडित जयनंदन झा, बाबू दीप नारायण सिंह और स्व० ध्रुव नारायण सिंह, अधिवक्ता के मन में आया था। इन्हीं महानुभावों के प्रयास से 1956 में एक विशेष बैठक बुलाई गई और पुस्तकालय की स्थापना की घोषणा की गई।
स्व० ध्रुव नारायण सिंह पुस्तकालय के प्रथम सचिव हुए। इनके ही प्रयास से अच्छी खासी संख्या में पुस्तकों का संग्रह किया गया और 24 जुलाई 1958 से गाँधी आश्रम के ही एक कमरे से पुस्तकालय की विधिवत शुरुआत हुई।
भूमि क्रय और भवन निर्माण (1960)
ध्रुव बाबू शुरू से ही यह चाहते थे कि पुस्तकालय का अपना भवन हो। फलतः उन्होंने सक्रियता दिखाते हुए दीप बाबू की सहायता से वर्ष 1960 में गांधी आश्रम से ही सटे 10 कट्ठा 10 धुर जमीन को दो बार में (28 जून 1960 को 5 कट्ठा 10 धुर व 2 दिसंबर 1960 को 5 कट्ठा) संस्था के नाम से खरीद लिया।
7 दिसंबर 1960 में उसी जमीन पर पुस्तकालय भवन की नींव तत्कालीन राज्यपाल (बिहार) ज़ाकिर हुसैन के कर कमलों द्वारा रखी गयी।
ठहराव और चुनौतियों का दौर (1966–1978)
पुस्तकालय की स्थापना और भवन निर्माण में स्व० ध्रुव नारायण सिंह का योगदान अविस्मरणीय है। वे आजीवन पुस्तकालय के लिए सक्रिय रहे।
उनके अस्वस्थ होने के बाद पुस्तकालय की गतिविधियां मंद पड़ गयीं। वर्ष 1966 से जनवरी 1978 तक पुस्तकालय लगभग बंदप्राय हो गया।
उनकी अनुपस्थिति में स्व० चन्द्रकेत शर्मा अधिवक्ता पुस्तकालय के सचिव चुने गए। वर्ष 2007 में एक असाध्य रोग के कारण उनका देहावसान हो गया। इसके बाद पुस्तकालय के सुचारु संचालन के लिए संरक्षक समिति गठन का प्रस्ताव रखा गया।
पुनर्जीवन और संगठनात्मक मजबूती (2009)
जागरूक सदस्यों के प्रयास से 23 जनवरी 2009 को तत्कालीन अनुमंडल पदाधिकारी की अध्यक्षता में एक बैठक बुलाई गयी।
इस बैठक में पूर्व के सह-सचिव सुयोग कुमार गोगी व सदस्यगण शशिकांत झा, शशि ओझा, पंडित सिद्धिनाथ मिश्र, मनोरंजन वर्मा, प्रो० राजीव नयन झा तथा भोलानाथ ठाकुर आदि उपस्थित हुए।
इस बैठक में एक कार्यकारिणी समिति बनाई गई जिसमें सर्वसम्मति से श्री भोलानाथ ठाकुर को पुस्तकालय का सचिव चुना गया।
इस समिति में पूर्व के कई सदस्य तथा अनेक नए सदस्य जोड़े गए।
संचालन, गतिविधियाँ और चुनौतियाँ (2009–2012)
श्री भोलानाथ ठाकुर की सक्रियता से पुस्तकालय का नियमित संचालन होने लगा।
पुस्तकालय की विभिन्न गतिविधियों — मासिक कवि गोष्ठी, गांधी जयंती, पुण्यतिथि तथा हिंदी दिवस — से पुस्तकालय की प्रासंगिकता बढ़ने लगी।
परंतु पुस्तकालय के सामने एक पुरानी चुनौती अब भी बनी रही — पुस्तकालय भवन व जमीन पर असामाजिक तत्वों व भू-माफियाओं द्वारा कब्जा जमाने के प्रयास।
इस समस्या के समाधान हेतु समिति ने तत्कालीन अनुमंडल अधिकारी श्री चंद्रशेखर सिंह से संपर्क किया।
12 नवंबर 2012 को श्री चंद्रशेखर सिंह की अध्यक्षता में एक बैठक संपन्न हुई।
इस बैठक में संस्था के संविधान के प्रारूप पर विमर्श हुआ, हस्ताक्षर किए गए, और विस्तृत अवलोकन हेतु अनुमंडलाधिकारी को सौंप दिया गया।
अध्यक्ष सह अनुमंडलाधिकारी द्वारा उस पर अनुमोदन प्रदान किया गया।
ट्रस्ट गठन और औपचारिक पंजीकरण (2013)
27 जनवरी 2013 की सभा में संविधान को अंतिम रूप से स्वीकृत कर ट्रस्ट बनाने का निर्णय लिया गया।
7 जुलाई 2013 की बैठक में ट्रस्ट के लिए पाँच ट्रस्टी सदस्यों का चयन किया गया —
शैलेन्द्र राकेश, भोलानाथ ठाकुर, मनोरंजन वर्मा, विनय चंद्र झा, अनिल लोदीपुरी।
14 नवंबर 2013 को अनुमंडलाधिकारी की अगुआई में गांधी स्मारक ट्रस्ट का पंजीकरण संपन्न हुआ।
वर्तमान में उसी ट्रस्ट के नेतृत्व में गठित कार्यकारिणी द्वारा पुस्तकालय की गतिविधियों का संचालन हो रहा है।
वर्तमान दृष्टि और लक्ष्य
आज गांधी स्मारक पुस्तकालय वैशाली के गौरवशाली इतिहास, साहित्य और कला संरक्षण के अपने मिशन में लगातार प्रयासरत है।
